शैख़ साहब की पैरवी कर के हम गुनहगार हो चुके होंगे
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हमारी मर्ज़ी से अब क्या बदलने वाला है तुम्हारे कब्ज़े में वोटिंग मशीन है साहब
Varun Anand
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जिस की हर शाख़ पे राधाएँ मचलती होंगी देखना कृष्ण उसी पेड़ के नीचे होंगे
Bekal Utsahi
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जाने कितने घटे-बढ़े होंगे मुद्दतें हो गईं सितारे गिने
Vikas Rana
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यारो कुछ तो ज़िक्र करो तुम उस की क़यामत बाँहों का वो जो सिमटते होंगे उन में वो तो मर जाते होंगे
Jaun Elia
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इश्क़ जब तक न कर चुके रुस्वा आदमी काम का नहीं होता
Jigar Moradabadi
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ज़माना तो उठाना चाहता है मैं पैर अपने जमाना चाहता हूँ
Shadab Shabbiri
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यूँँ तो कोई भी बे-लिबास न था फिर भी लगता था बे-लिबासी थी उस सेे मिल कर ख़ुशी हुई थी मुझे और फिर देर तक उदासी थी
Shadab Shabbiri
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यूँँ तो कोई भी बे-लिबास न था फिर भी लगता था बे-लिबासी थी उस से मिल कर ख़ुशी हुई थी मुझे और फिर देर तक उदासी थी
Shadab Shabbiri
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तुम्हें शादाब होना चाहिए था मगर तुम हो कि मुरझाए हुए हो
Shadab Shabbiri
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तिरा दीदार हो जाता मगर अफ़सोस है इस पर कभी कुछ काम ले डूबा कभी आराम ले डूबा
Shadab Shabbiri
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