shiddat-e-pyas ke ehsas ko badhne dije ediyon se kabhi chashme bhi ubal sakte hain
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ये कभी मिलने चले आऍंगे सदियों बा'द भी वक़्त के पन्नों में कुछ लम्हात रख कर देखिए
nakul kumar
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सिगरेट की शक्ल में कभी चाय की शक्ल में इक प्यास है कि जिस को पिए जा रहे हैं हम
Ameer Imam
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बचपना ऐ लड़को तुम सेे कभी छूटता ही नहीं जवान होना तो बस लड़कियों को आता है
Kumar Vishwas
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दौलत शोहरत बीवी बच्चे अच्छा घर और अच्छे दोस्त कुछ तो है जो इन के बा'द भी हासिल करना बाक़ी है कभी-कभी तो दिल करता है चलती रेल से कूद पड़ूॅं फिर कहता हूँ पागल अब तो थोड़ा रस्ता बाक़ी है
Zia Mazkoor
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तुम्हें लौटा रहा हूँ ख़त तुम्हारे कभी तुम क्या थीं ख़ुद ही देख लेना
Gaurav Trivedi
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ज़िंदगी का हर वरक़ बा-शौक़ पढ़िए ये किताब इक रोज़ लौटानी भी तो है
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याद करूँँगा इतनी शिद्दत से रब को मैं मेरी इबादत से तेरा चेहरा निखरेगा
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तुम्हें पता नहीं यहाँ कि कौन हूँ यहाँ का मैं सलाम करता है मुझे यहाँ का बादशाह भी
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उस का मेरा साथ होना चाँद-तारों जैसा ही है दूरियाँ हैं तो बहुत पर लगता है इक साथ ही हैं
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ज़रा तुम अपनी हद में रहने की कोशिश करो वरना तुम्हारे ऐब से इक दिन तुम्हें बदनाम कर देंगे
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