शिकायत हम भी करना चाहते हैं मगर ये ज़ब्त हावी हो रहा है
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मैं अगर अपनी जवानी के सुना दूँ क़िस्से ये जो लौंडे हैं मेरे पाँव दबाने लग जाए
Mehshar Afridi
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बात करो रूठे यारों से सन्नाटों से डर जाते हैं प्यार अकेला जी लेता है दोस्त अकेले मर जाते हैं
Kumar Vishwas
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ये शहर-ए-अजनबी में अब किसे जा कर बताएँ हम कहाँ के रहने वाले हैं कहाँ की याद आती है
Ashu Mishra
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कैसा दिल और इस के क्या ग़म जी यूँँ ही बातें बनाते हैं हम जी
Jaun Elia
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ये अलग बात कि ख़ामोश खड़े रहते हैं फिर भी जो लोग बड़े हैं, वो बड़े रहते हैं
Rahat Indori
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जैसे कि फूल शाख के और चाँद ईद के हम भी तो साथ-साथ हैं पर उस तरह नहीं
Shivam chaubey
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उस की लुगत में सब्र का मतलब क्या होगा मेरी लुगत में सब्र का मतलब धोखा है
Shivam chaubey
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हमारे साथ भी रह कर नहीं पिघल पाया नदी की क़ुर्ब में पत्थर नहीं हुआ पानी
Shivam chaubey
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उस के हिज्र का इक लम्हा जो मैं ने बरसों बरस जिया उस ने तो बस तागा खींचा मैं ने खूब उधेड़ा दुख
Shivam chaubey
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तेरे आने से कुछ नहीं होगा मन तो बहलेगा ग़म बहाली से
Shivam chaubey
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