सितम्बर को सितमगर लिखते हैं यही तो हम सुख़न-वर लिखते हैं
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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ये अलग बात कि ख़ामोश खड़े रहते हैं फिर भी जो लोग बड़े हैं, वो बड़े रहते हैं
Rahat Indori
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शाख़ों से टूट जाएँ वो पत्ते नहीं हैं हम आँधी से कोई कह दे कि औक़ात में रहे
Rahat Indori
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ख़ुद से भी मिल न सको, इतने पास मत होना इश्क़ तो करना, मगर देवदास मत होना देखना, चाहना, फिर माँगना, या खो देना ये सारे खेल हैं, इन में उदास मत होना
Kumar Vishwas
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तुम्हारे पाँव क़सम से बहुत ही प्यारे हैं ख़ुदा करे मेरे बच्चों की इन में जन्नत हो
Rafi Raza
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ज़ौक़-ए-मोहब्बत चख लिया हम ने और जानने को कुछ नहीं है अब
Manoj Devdutt
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ये हाथ उस के हाथ में होते हम कब धुएँ के साथ में होते
Manoj Devdutt
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तेरे नज़दीक आ कर सोचता हूँ हक़ीक़त है या कोई ख़्वाब है ये
Manoj Devdutt
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उसे मच्छर नहीं खाते हैं कि हम को पाप लग जाएगा
Manoj Devdutt
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सबने हँसी तो देख ली मेरी देखें नहीं है ग़म किसी ने भी
Manoj Devdutt
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