sochta hun teri taswir dikha dun us ko raushni ne kabhi saya nahin dekha apna
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मैं क्या बताऊँ वो कितना क़रीब है मेरे मेरा ख़याल भी उस को सुनाई देता है वो जिस ने आँख अता की है देखने के लिए उसी को छोड़ के सब कुछ दिखाई देता है
Zubair Ali Tabish
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आइने की आँख ही कुछ कम न थी मेरे लिए जाने अब क्या क्या दिखाएगा तुम्हारा देखना
Parveen Shakir
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मैं सोचता हूँ बहुत ज़िंदगी के बारे में ये ज़िंदगी भी मुझे सोच कर न रह जाए
Abhishek shukla
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मोहब्बतों में दिखावे की दोस्ती न मिला अगर गले नहीं मिलता तो हाथ भी न मिला
Bashir Badr
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मुझे आँखें दिखा कर बोलती है चुप रहो भैया बहिन छोटी भले हो बात वो अम्मा सी करती है
Divy Kamaldhwaj
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वो किसी को याद कर के मुस्कुराया था उधर और मैं नादान ये समझा कि वो मेरा हुआ
Iqbal Ashhar
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हमें भी वक़्त ने पत्थर सिफ़त बना डाला हमीं थे मोम की सूरत पिघलने वाले लोग सितम तो ये कि हमारी सफ़ों में शामिल हैं चराग़ बुझते ही ख़ेमा बदलने वाले लोग
Iqbal Ashhar
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आज फिर नींद को आँखों से बिछड़ते देखा आज फिर याद कोई चोट पुरानी आई
Iqbal Ashhar
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वो जो ख़्वाब थे मेरे ज़ेहन में न मैं कह सका न मैं लिख सका कि ज़बाँ मिली तो कटी हुई जो क़लम मिला तो बिका हुआ
Iqbal Ashhar
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मुद्दतों ब'अद मुयस्सर हुआ माँ का आँचल मुद्दतों ब'अद हमें नींद सुहानी आई
Iqbal Ashhar
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