सुन भी लो अब, रुक ही जाओ यूँ न कहना टाल मेरा
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ये मुझे चैन क्यूँ नहीं पड़ता एक ही शख़्स था जहान में क्या
Jaun Elia
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ले दे के अपने पास फ़क़त इक नज़र तो है क्यूँँ देखें ज़िंदगी को किसी की नज़र से हम
Sahir Ludhianvi
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ज़रा ठहरो कि शब फीकी बहुत है तुम्हें घर जाने की जल्दी बहुत है ज़रा नज़दीक आ कर बैठ जाओ तुम्हारे शहर में सर्दी बहुत है
Zubair Ali Tabish
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इलाज अपना कराते फिर रहे हो जाने किस किस से मोहब्बत कर के देखो ना मोहब्बत क्यूँँ नहीं करते
Farhat Ehsaas
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लोग हर मोड़ पे रुक रुक के सँभलते क्यूँँ हैं इतना डरते हैं तो फिर घर से निकलते क्यूँँ हैं मोड़ होता है जवानी का सँभलने के लिए और सब लोग यहीं आ के फिसलते क्यूँँ हैं
Rahat Indori
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ज़िक्र अब भी मेरा किया होगा नाम इक मरतबा लिया होगा ग़म उसे ना सहें गए हो जब जाम पे जाम फिर पिया होगा
Kohar
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ज़ख़्म अपनों से मिले है ग़ैर पूछे हाल मेरा
Kohar
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उस को मुझ सेे दूरी पर रख कर अब मैं तन्हा अपनी रातें करता हूँ
Kohar
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कुछ इस तरह मुझ से गुजर छू कर मुझे ना हो ख़बर कोई सीधे दिल पर लगे कुछ बात कह कर फिर मुकर
Kohar
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जब से गया है छोड़ कर ग़म से रहा हूँ तर बतर
Kohar
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