ता-उम्र जिस की आँख ने देखा नहीं मुझे ता-उम्र के लिए वो मिरे पास आ गया
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बिछड़ गए तो ये दिल उम्र भर लगेगा नहीं लगेगा लगने लगा है मगर लगेगा नहीं नहीं लगेगा उसे देख कर मगर ख़ुश है मैं ख़ुश नहीं हूँ मगर देख कर लगेगा नहीं
Umair Najmi
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इस लिए ये महीना ही शामिल नहीं उम्र की जंत्री में हमारी उस ने इक दिन कहा था कि शादी है इस फरवरी में हमारी
Tehzeeb Hafi
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तुम्हें हुस्न पर दस्तरस है मोहब्बत वोहब्बत बड़ा जानते हो तो फिर ये बताओ कि तुम उस की आँखों के बारे में क्या जानते हो ये जुग़राफ़िया फ़ल्सफ़ा साईकॉलोजी साइंस रियाज़ी वग़ैरा ये सब जानना भी अहम है मगर उस के घर का पता जानते हो
Tehzeeb Hafi
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हमारे बा'द तेरे इश्क़ में नए लड़के बदन तो चू मेंगे ज़ुल्फ़ें नहीं सँवारेंगे
Vikram Gaur Vairagi
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कुछ बात है कि हस्ती मिटती नहीं हमारी सदियों रहा है दुश्मन दौर-ए-ज़माँ हमारा
Allama Iqbal
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ये पता चलता आज़माने पर कौन रोता है दूर जाने पर मैं अलग हूँ ज़रा ज़माने से मुस्कुराता हूँ मैं सताने पर
salman khan "samar"
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उर्दू से इश्क़ या इश्क़ से उर्दू है नाम कुछ भी हो ख़ुशबू तो दोनों में है
salman khan "samar"
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वो फिर मिलेंगे राह में बे-वक़्त बे-वजह हम को है इत्तिफ़ाक़ से उम्मीद आज भी
salman khan "samar"
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वो हाथ पकड़ कर के 'समर' खींचना उस का इक शख़्स के हाथों में तिरी याद है सीकर
salman khan "samar"
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सीकर में रह गया है मिरा एक और दिन आऊँगा लौट कर मैं तिरे पास आगरा
salman khan "samar"
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