talluqat ki garmi na e'tibar ki dhup jhulas rahi hai zamane ko intishaar ki dhup
sherKuch Alfaaz
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हर शे'र हर ग़ज़ल पे है ऐसी छाप तेरी तस्वीर बन रही है इक अपने आप तेरी तेरे लिए किसी को इतना दीवाना देखा लगने लगी है मुझ को चाहत भी पाप तेरी
Sandeep Thakur
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चाँद ने ओढ़ ली है चादर-ए-अब्र अब वो कपड़े बदल रही होगी
Jaun Elia
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मुक़र्रर दिन नहीं तो लम्हा-ए-इमकान में आओ अगर तुम मिल नहीं सकती तो मेरे ध्यान में आओ बला की ख़ूब-सूरत लग रही हो आज तो जानाँ मुझे इक बात कहनी थी तुम्हारे कान में.. आओ
Darpan
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दुश्मनी लाख सही ख़त्म न कीजे रिश्ता दिल मिले या न मिले हाथ मिलाते रहिए
Nida Fazli
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यादों की रेल और कहीं जा रही थी फिर ज़ंजीर खींच कर ही उतरना पड़ा मुझे
Zehra Shah
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