तमाम जिस्म को आँखें बना के राह तको तमाम खेल मुहब्बत में इंतिज़ार का है
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हम किसी को राह में कुछ देर भी तक लें अगर पागलों को जो मिले तो सब के सब पागल मिले
nakul kumar
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नई नई आँखें हों तो हर मंज़र अच्छा लगता है कुछ दिन शहर में घू में लेकिन अब घर अच्छा लगता है
Nida Fazli
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इक रोज़ खेल खेल में हम उस के हो गए और फिर तमाम उम्र किसी के नहीं हुए
Vipul Kumar
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शतक बनाने को बस एक रन बनाना है वो दोस्त बन गई है अब दुल्हन बनाना है
Charagh Sharma
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बिठा दिया है सिपाही के दिल में डर उस ने तलाशी दी है दुपट्टा उतार कर उस ने मैं इस लिए भी उसे ख़ुद-कुशी से रोकता हूँ लिखा हुआ है मेरा नाम जिस्म पर उस ने
Zia Mazkoor
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सज़ा कितनी बड़ी है गाँव से बाहर निकलने की मैं मिट्टी गूँधता था अब डबलरोटी बनाता हूँ
Munawwar Rana
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इंसानों को जलवाएगी कल इस से ये दुनिया जो बच्चा खिलौना भी ज़मीं पर नहीं रखता
Munawwar Rana
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जिस ने भी इस ख़बर को सुना सर पकड़ लिया कल एक दिए ने आंधी का कॉलर पकड़ लिया
Munawwar Rana
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वो ज़ालिम मेरी हर ख़्वाहिश ये कह कर टाल जाता है दिसंबर जनवरी में कोई नैनीताल जाता है?
Munawwar Rana
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डरा-धमका के तुम हम सेे वफ़ा करने को कहते हो कहीं तलवार से भी पाँव का काँटा निकलता है
Munawwar Rana
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