तन्हाई की रात में उस की ज़ुल्फ़ की याद निकलती है उस की दीद को सब अरमानों की तादाद निकलती है
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मेहरबाँ हम पे हर इक रात हुआ करती थी आँख लगते ही मुलाक़ात हुआ करती थी हिज्र की रात है और आँख में आँसू भी नहीं ऐसे मौसम में तो बरसात हुआ करती थी
Ismail Raaz
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जैसे तुम ने वक़्त को हाथ में रोका हो सच तो ये है तुम आँखों का धोख़ा हो
Tehzeeb Hafi
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कितने ऐश से रहते होंगे कितने इतराते होंगे जाने कैसे लोग वो होंगे जो उस को भाते होंगे
Jaun Elia
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क्यूँ डरें ज़िन्दगी में क्या होगा कुछ न होगा तो तजरबा होगा
Javed Akhtar
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घर में भी दिल नहीं लग रहा काम पर भी नहीं जा रहा जाने क्या ख़ौफ़ है जो तुझे चूम कर भी नहीं जा रहा रात के तीन बजने को है यार ये कैसा महबूब है जो गले भी नहीं लग रहा और घर भी नहीं जा रहा
Tehzeeb Hafi
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ये फ़क़त माँग में भरने से शाज़ सिन्दूर हो जाता है
Milan Gautam
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ज़ियादा शक की गुंजाइश नहीं होगी यक़ीं मानो तुम्हारे हिस्से का तुम को समय और फ़ासला दूँगा
Milan Gautam
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यारो मैं इश्क़ में हुआ हूँ जब से मुब्तला यमराज मेरी जान के चक्कर लगाते हैं
Milan Gautam
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उस ने माँगी ज़मीन-ए-मोहब्बत मिरी मैं भी उद्दीप्त उर का गगन दे चुका
Milan Gautam
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ये ज़ुल्मतें कि चराग़ों पे हावी हो रही हैं वो हुस्न सामने आए सियाही छट जाए
Milan Gautam
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