तिफ़्ल-ए-हसीं क़िस्सा बयाँ करने लगा सुनके हँसी से पेट ही भरने लगा
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जनाज़े पर मेरे लिख देना यारों मोहब्बत करने वाला जा रहा है
Rahat Indori
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ग़म-ए-फ़ुर्क़त का शिकवा करने वाली मेरी मौजूदगी में सो रही है
Jaun Elia
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अगर है इश्क़ सच्चा तो निगाहों से बयाँ होगा ज़बाँ से बोलना भी क्या कोई इज़हार होता है
Bhaskar Shukla
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उस ने देखा मुझ को तो कुण्डी लगानी छोड़ दी फिर मिरे होंठों पे इक आधी कहानी छोड़ दी मैं छुपाए फिर रहा था इश्क़ अपने गाँव में और फिर ज़ालिम ने गर्दन पे निशानी छोड़ दी
nakul kumar
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मैं भी इक शख़्स पे इक शर्त लगा बैठा था तुम भी इक रोज़ इसी खेल में हारोगे मुझे ईद के दिन की तरह तुम ने मुझे ज़ाया' किया मैं समझता था मुहब्बत से गुज़ारोगे मुझे
Ali Zaryoun
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कामयाबी से फली फूली मुहब्बत है तेरी हम सेफ़र के साथ दुनिया ख़ूब-सूरत है तेरी
Manohar Shimpi
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सितारों के सिवा भी ये निराली ही मुझे लगती चराग़ों से सजी महफ़िल दिवाली ही मुझे लगती
Manohar Shimpi
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शराब-ए-हक़ीक़त किसे ही बताता वो जाम-ए-इनायत कहाँ फिर छुपाता
Manohar Shimpi
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सितम वो ही करे दाद-ए-जफ़ा भी बहुत सारे हुए उस से ख़फ़ा भी
Manohar Shimpi
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उम्मीद ने बे-रुख़ कहाँ हम को किया जब भी दिया है वो खुले दिल से दिया
Manohar Shimpi
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