तिरे ये आशिक़ों की भीड़ से है शहर में रौनक़ नहीं तो शहर की क़िस्मत में सन्नाटा है मरघट का
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तुम्हें हुस्न पर दस्तरस है मोहब्बत वोहब्बत बड़ा जानते हो तो फिर ये बताओ कि तुम उस की आँखों के बारे में क्या जानते हो ये जुग़राफ़िया फ़ल्सफ़ा साईकॉलोजी साइंस रियाज़ी वग़ैरा ये सब जानना भी अहम है मगर उस के घर का पता जानते हो
Tehzeeb Hafi
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किसी को घर से निकलते ही मिल गई मंज़िल कोई हमारी तरह उम्र भर सफ़र में रहा
Ahmad Faraz
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बिछड़ कर उस का दिल लग भी गया तो क्या लगेगा वो थक जाएगा और मेरे गले से आ लगेगा मैं मुश्किल में तुम्हारे काम आऊँ या ना आऊँ मुझे आवाज़ दे लेना तुम्हें अच्छा लगेगा
Tehzeeb Hafi
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हम वो हैं जो ख़ुदा को भूल गए तुम मेरी जान किस गुमान में हो
Jaun Elia
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मुझ से मत पूछो के उस शख़्स में क्या अच्छा है अच्छे अच्छों से मुझे मेरा बुरा अच्छा है किस तरह मुझ से मुहब्बत में कोई जीत गया ये न कह देना के बिस्तर में बड़ा अच्छा है
Tehzeeb Hafi
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तिरी मासूमियत बर्बाद कर देगी मुझे इक दिन बिना काँटों भरी राहें सभी आसाँ समझते हैं
arjun chamoli
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जब भी आता है ये ज़िक्र कैसे भी जन्नत का मेरी बाहों में तेरा सिमटना याद आता है लफ़्ज़ ता'रीफ़ के तेरे सुनते ही शर्माना तेरे गालों का वो सुर्ख़ होना याद आता है
arjun chamoli
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फ़क़त इतनी तमन्ना साथ तेरा पाने की मुझ को मिरा दिल कह रहा जीना नहीं तेरे बिना अब तो
arjun chamoli
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अपने आँचल को वो बड़ी अदास बचाते हैं मेरा हाथ ज़रा छू जाए नज़रें चुराते हैं
arjun chamoli
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मिरे ख़िलाफ़ ही सब दस्तख़त हुए आख़िर मैं चुप रहा तो गुनहगार मुझ को माना है
arjun chamoli
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