जब भी आता है ये ज़िक्र कैसे भी जन्नत का मेरी बाहों में तेरा सिमटना याद आता है लफ़्ज़ ता'रीफ़ के तेरे सुनते ही शर्माना तेरे गालों का वो सुर्ख़ होना याद आता है
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मेरे आँसू नहीं थम रहे कि वो मुझ सेे जुदा हो गया और तुम कह रहे हो कि छोड़ो अब ऐसा भी क्या हो गया मय-कदों में मेरी लाइनें पढ़ते फिरते हैं लोग मैं ने जो कुछ भी पी कर कहा फ़लसफ़ा हो गया
Tehzeeb Hafi
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हम वो हैं जो ख़ुदा को भूल गए तुम मेरी जान किस गुमान में हो
Jaun Elia
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कोई शहर था जिस की एक गली मेरी हर आहट पहचानती थी मेरे नाम का इक दरवाज़ा था इक खिड़की मुझ को जानती थी
Ali Zaryoun
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अब ज़रूरी तो नहीं है कि वो सब कुछ कह दे दिल में जो कुछ भी हो आँखों से नज़र आता है मैं उस सेे सिर्फ़ ये कहता हूँ कि घर जाना है और वो मारने मरने पे उतर आता है
Tehzeeb Hafi
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गले तो लगना है उस से कहो अभी लग जाए यही न हो मेरा उस के बग़ैर जी लग जाए मैं आ रहा हूँ तेरे पास ये न हो कि कहीं तेरा मज़ाक़ हो और मेरी ज़िंदगी लग जाए
Tehzeeb Hafi
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मैं ग़मों की धूप में जल गया तो पता चला मुझे छाँव का वो तो दूर रह के भी पास था मुझे फ़ासलों का गुमाँ रहा
arjun chamoli
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रोज़ अंदाज़ बदलते हैं मिरी क़िस्मत के पुर-ख़तर ख़्वाब में दुश्मन थे मिले फ़रहत के
arjun chamoli
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मिरे ख़िलाफ़ ही सब दस्तख़त हुए आख़िर मैं चुप रहा तो गुनहगार मुझ को माना है
arjun chamoli
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सर-ए-महफ़िल वो इतरा कर नुमाइश हुस्न की करते मगर उस पर ये दावा है मोहब्बत हम से ही करते
arjun chamoli
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सब्र का है इम्तिहाँ और जब्र भी है इंतिहा पास वो आते नहीं और दूर भी जाने न दें
arjun chamoli
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