मैं ग़मों की धूप में जल गया तो पता चला मुझे छाँव का वो तो दूर रह के भी पास था मुझे फ़ासलों का गुमाँ रहा
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शाख़ों से टूट जाएँ वो पत्ते नहीं हैं हम आँधी से कोई कह दे कि औक़ात में रहे
Rahat Indori
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तेरी सूरत से है आलम में बहारों को सबात तेरी आँखों के सिवा दुनिया में रक्खा क्या है
Faiz Ahmad Faiz
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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सोचूँ तो सारी उम्र मोहब्बत में कट गई देखूँ तो एक शख़्स भी मेरा नहीं हुआ
Jaun Elia
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अगर तुम हो तो घबराने की कोई बात थोड़ी है ज़रा सी बूँदा-बाँदी है बहुत बरसात थोड़ी है ये राह-ए-इश्क़ है इस में क़दम ऐसे ही उठते हैं मोहब्बत सोचने वालों के बस की बात थोड़ी है
Abrar Kashif
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ये बताओ इश्क़ का ये फ़लसफ़ा क्या है दूरियाँ जब मिट गई तो अब बचा क्या है
arjun chamoli
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तड़प के रोए हैं चेहरा अगर छुपाया है कि लोग देख न ले आँख में समुंदर को
arjun chamoli
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भुला के छोड़ दिया उस गली में चलना भी कि दाग़ लगने न पाए किसी के दामन पर
arjun chamoli
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वो बिजली का जैसे दिल में गिर जाना आँखों का इतराना रुख़ का शर्माना गालों पे उन के वो लाली का आना हाथों से हाथों का ख़ुद में टकराना कैसे बयाँ करूँँ क्या-क्या है बतलाना छोटी सी मज्लिस में उन सेे छू जाना
arjun chamoli
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ये रिश्तों की अहमियत का असर यूँँ है ज़िंदगी में जो इक रिश्ता टूट जाए बिखरती है ज़िंदगी भी
arjun chamoli
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