तोहमत उतार फेंकी लबादा बदल लिया ख़ुद को ज़रूरतों से ज़ियादा बदल लिया
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वो मेरी पीठ में ख़ंजर ज़रूर उतारेगा मगर निगाह मिलेगी तो कैसे मारेगा
Waseem Barelvi
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जब मुंडेरों से धूप ढलती है तो कमी उस की मुझ को खलती है जो हथेली पे अपनी लिखती थी दोस्ती प्यार में बदलती है
Sandeep Thakur
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हम को नीचे उतार लेंगे लोग इश्क़ लटका रहेगा पंखे से
Zia Mazkoor
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ईद का चाँद तुम ने देख लिया चाँद की ईद हो गई होगी
Idris Azad
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कबूतर इश्क़ का उतरे तो कैसे? तुम्हारी छत पे निगरानी बहुत है इरादा कर लिया गर ख़ुद-कुशी का तो ख़ुद की आँख का पानी बहुत है
Kumar Vishwas
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क्या तमाशा है कि सब मुझ को बुरा कहते हैं और सब चाहते हैं मेरी तरह का होना
Abbas Tabish
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देख कैसे धुल गए है गिर्या-ओ-ज़ारी के बा'द आसमाँ बारिश के बा'द और मैं अज़ादारी के बा'द इस सेे बढ़ कर तो तुझे कोई हुनर आता नहीं सोचता हूँ क्या करेगा दिल आज़ारी के बा'द
Abbas Tabish
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मैं ने आँखों के किनारे भी न तर होने दिए जिस तरफ़ से आया था सैलाब वापस कर दिया
Abbas Tabish
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मुझ को उस की आँखों में कूदने की आदत है मैं तुम्हें बताऊँगा ख़ुद-कुशी के बारे में
Abbas Tabish
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मैं तो ऐ इश्क़ तेरी कूज़ा-गरी जानता हूँ तू ने हम दो को मिलाया तो बना एक ही शख़्स
Abbas Tabish
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