तू नया है तो दिखा सुब्ह नई शाम नई वर्ना इन आँखों ने देखे हैं नए साल कई
sherKuch Alfaaz
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रक़ीबों ने कहा मुझ सेे दिखाओ रूम तुम अपना किताबें ग़म उदासी और इक फ़ोटो मिली उन को
Rohit Gustakh
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गीत लिक्खे भी तो ऐसे के सुनाएँ न गए ज़ख़्म यूँँ लफ़्ज़ों में उतरे के दिखाएँ न गए आज तक रक्खे हैं पछतावे की अलमारी में एक दो वादे जो दोनों से निभाएँ न गए
Farhat Abbas Shah
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उजाले अपनी यादों के हमारे साथ रहने दो न जाने किस गली में ज़िंदगी की शाम हो जाए
Bashir Badr
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हमीं तलाश के देते हैं रास्ता सब को हमीं को बा'द में रस्ता दिखाया जाता है
Varun Anand
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नक़्शा उठा के कोई नया शहर ढूँढ़िए इस शहर में तो सब से मुलाक़ात हो गई
Nida Fazli
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