टूटना ही है जान कर भी ये फूल क्यूँँ बार बार खिलता है
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तुम्हें हुस्न पर दस्तरस है मोहब्बत वोहब्बत बड़ा जानते हो तो फिर ये बताओ कि तुम उस की आँखों के बारे में क्या जानते हो ये जुग़राफ़िया फ़ल्सफ़ा साईकॉलोजी साइंस रियाज़ी वग़ैरा ये सब जानना भी अहम है मगर उस के घर का पता जानते हो
Tehzeeb Hafi
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हम वो हैं जो ख़ुदा को भूल गए तुम मेरी जान किस गुमान में हो
Jaun Elia
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कोई शहर था जिस की एक गली मेरी हर आहट पहचानती थी मेरे नाम का इक दरवाज़ा था इक खिड़की मुझ को जानती थी
Ali Zaryoun
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मुद्दतें गुज़र गई 'हिसाब' नहीं किया न जाने अब किस के कितने रह गए हम
Kumar Vishwas
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मसअला ये नहीं कि इश्क़ हुआ है हम को मसअला ये है कि इज़हार किया जाना है
Rajesh Reddy
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उसी से प्यार है जिस से हमें नाराज़गी भी है जहाँ पर बैर होता है वहीं वाबस्तगी भी है
Javed Aslam
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ज़िक्र बादल का भी होना चाहिए सिर्फ़ सावन का यहाँ चर्चा हुआ
Javed Aslam
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अजब है इम्तिहान-ए-ज़िंदगी 'असलम' जहाँ में इसी पर्चे में हल भी है इसी में मसअला है
Javed Aslam
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रेलगाड़ी है ये जहाँ अपना मंज़िलें अपनी अपने सामाँ हैं हम सफ़र थे जो एक दो पल के मेरे दिल के वो ख़ास मेहमाँ हैं
Javed Aslam
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वो रास्ते भी आज कई मंज़िला हुए मेरा जो रास्ता था ज़मीं पर नहीं रहा
Javed Aslam
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