रेलगाड़ी है ये जहाँ अपना मंज़िलें अपनी अपने सामाँ हैं हम सफ़र थे जो एक दो पल के मेरे दिल के वो ख़ास मेहमाँ हैं
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कुछ न रह सका जहाँ विरानियाँ तो रह गईं तुम चले गए तो क्या कहानियाँ तो रह गईं
Khalil Ur Rehman Qamar
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हज़ारों साल नर्गिस अपनी बे-नूरी पे रोती है बड़ी मुश्किल से होता है चमन में दीदा-वर पैदा
Allama Iqbal
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ले दे के अपने पास फ़क़त इक नज़र तो है क्यूँँ देखें ज़िंदगी को किसी की नज़र से हम
Sahir Ludhianvi
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हम अपनी जान के दुश्मन को अपनी जान कहते हैं मोहब्बत की इसी मिट्टी को हिंदुस्तान कहते हैं
Rahat Indori
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अब मैं सारे जहाँ में हूँ बदनाम अब भी तुम मुझ को जानती हो क्या
Jaun Elia
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उसी से प्यार है जिस से हमें नाराज़गी भी है जहाँ पर बैर होता है वहीं वाबस्तगी भी है
Javed Aslam
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अजब है इम्तिहान-ए-ज़िंदगी 'असलम' जहाँ में इसी पर्चे में हल भी है इसी में मसअला है
Javed Aslam
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ज़िक्र बादल का भी होना चाहिए सिर्फ़ सावन का यहाँ चर्चा हुआ
Javed Aslam
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है नुक़्ता यही जिस पर ईमान सभी का है आया है जो दुनिया में लाज़िम उसे जाना है बर्दाश्त नहीं करतीं कहती हैं ये जागीरें तुम तो गए दुनिया से बस नाम हटाना है
Javed Aslam
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हैं जो आईन मुहब्बत के मुख़ालिफ़ 'असलम' पास होते नहीं दिल वालों के एवानों में
Javed Aslam
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