तू आ गया है तो किसी कोने में जा के रो सब को हमारी मौत का कारण नहीं पता
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अगर तुम हो तो घबराने की कोई बात थोड़ी है ज़रा सी बूँदा-बाँदी है बहुत बरसात थोड़ी है ये राह-ए-इश्क़ है इस में क़दम ऐसे ही उठते हैं मोहब्बत सोचने वालों के बस की बात थोड़ी है
Abrar Kashif
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हज़ारों साल नर्गिस अपनी बे-नूरी पे रोती है बड़ी मुश्किल से होता है चमन में दीदा-वर पैदा
Allama Iqbal
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ज़रा ठहरो कि शब फीकी बहुत है तुम्हें घर जाने की जल्दी बहुत है ज़रा नज़दीक आ कर बैठ जाओ तुम्हारे शहर में सर्दी बहुत है
Zubair Ali Tabish
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ले दे के अपने पास फ़क़त इक नज़र तो है क्यूँँ देखें ज़िंदगी को किसी की नज़र से हम
Sahir Ludhianvi
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किसी गली में किराए पे घर लिया उस ने फिर उस गली में घरों के किराए बढ़ने लगे
Umair Najmi
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ये कमीने वक़्त पर वापस नहीं देते दोस्तों को तुम कभी पैसे नहीं देना
Raja Singh 'Kaabil'
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याद मुझ को उस ने इतना कर लिया हिचकियों से साँस मेरी रुक गई
Raja Singh 'Kaabil'
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ख़्वाब में भी हाथ जो तू ने लगाया यार उस दिन मैं हक़ीक़त में मरूँगा
Raja Singh 'Kaabil'
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इश्क़ का क़ानून पढ़ने में लगा हूँ आशिक़ों के केस सारे मैं लड़ूँगा
Raja Singh 'Kaabil'
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तुम रखो बंदूक़ मेरे सर पे लेकिन मैं सनम लव यूँ तुम्हें कह कर रहूँगा
Raja Singh 'Kaabil'
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