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तूफ़ानों से डर लगता है कुछ रिश्तों से घर लगता है तूफ़ानों में अब घर मेरा अब रिश्तों से डर लगता है

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तुम्हें हुस्न पर दस्तरस है मोहब्बत वोहब्बत बड़ा जानते हो तो फिर ये बताओ कि तुम उस की आँखों के बारे में क्या जानते हो ये जुग़राफ़िया फ़ल्सफ़ा साईकॉलोजी साइंस रियाज़ी वग़ैरा ये सब जानना भी अहम है मगर उस के घर का पता जानते हो

Tehzeeb Hafi

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किसी को घर से निकलते ही मिल गई मंज़िल कोई हमारी तरह उम्र भर सफ़र में रहा

Ahmad Faraz

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हम वो हैं जो ख़ुदा को भूल गए तुम मेरी जान किस गुमान में हो

Jaun Elia

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बिछड़ कर उस का दिल लग भी गया तो क्या लगेगा वो थक जाएगा और मेरे गले से आ लगेगा मैं मुश्किल में तुम्हारे काम आऊँ या ना आऊँ मुझे आवाज़ दे लेना तुम्हें अच्छा लगेगा

Tehzeeb Hafi

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शाख़ों से टूट जाएँ वो पत्ते नहीं हैं हम आँधी से कोई कह दे कि औक़ात में रहे

Rahat Indori

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More from Divya 'Kumar Sahab'

मैं भरोसे को बचाने पर तुला हूँ वो बहानों पर उतरता जा रहा है

Divya 'Kumar Sahab'

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लोग यहाँ पर आएँगे तो रंग लगाने मुझ को फिर भी शायद रंगों में लिपटा इक हाथ तुम्हार हो सकता था दो बच्चों ने मल मल कर जब रंग लगाया इक दूजे को दोस्त यही लगता है ऐसा साथ हमारा हो सकता था

Divya 'Kumar Sahab'

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प्यार लुटाने पर मेरा मन हर पल बस ये दोहराता है प्यार लुटाने वाले सारे लोग अकेले रह जाते हैं

Divya 'Kumar Sahab'

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ज़िंदगी से एक दिन मैं ने कहा था प्यार है ज़िंदगी ने बात मेरी दोस्ती पर रोक दी

Divya 'Kumar Sahab'

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ये रिश्तों से बना है घर ये ईटों का मकाँ कुछ है मुझे ये छत बताती है पिता का सायबाँ कुछ है बुलंदी पर पहुँच माता पिता को छोड़ देते हैं अरे पागल धरा जब तक तभी तक आसमाँ कुछ है

Divya 'Kumar Sahab'

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