ये रिश्तों से बना है घर ये ईटों का मकाँ कुछ है मुझे ये छत बताती है पिता का सायबाँ कुछ है बुलंदी पर पहुँच माता पिता को छोड़ देते हैं अरे पागल धरा जब तक तभी तक आसमाँ कुछ है
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ये मुझे चैन क्यूँ नहीं पड़ता एक ही शख़्स था जहान में क्या
Jaun Elia
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क्या ख़बर कौन था वो, और मेरा क्या लगता था जिस सेे मिल कर मुझे, हर शख़्स बुरा लगता था
Tehzeeb Hafi
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कुछ न रह सका जहाँ विरानियाँ तो रह गईं तुम चले गए तो क्या कहानियाँ तो रह गईं
Khalil Ur Rehman Qamar
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तू मोहब्बत से कोई चाल तो चल हार जाने का हौसला है मुझे
Ahmad Faraz
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सैर कर दुनिया की ग़ाफ़िल ज़िंदगानी फिर कहाँ ज़िंदगी गर कुछ रही तो ये जवानी फिर कहाँ
Khwaja Meer Dard
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तुम तो कहते थे कि मैं रोता नहीं हूँ कब से इतना मुस्कुराया जा रहा है
Divya 'Kumar Sahab'
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मैं भरोसे को बचाने पर तुला हूँ वो बहानों पर उतरता जा रहा है
Divya 'Kumar Sahab'
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यही वो लोग जब माँगो मदद मुँह फेर लेते हैं यही वो हैं जो कहते हैं मदद कोई नहीं करता
Divya 'Kumar Sahab'
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प्यार लुटाने पर मेरा मन हर पल बस ये दोहराता है प्यार लुटाने वाले सारे लोग अकेले रह जाते हैं
Divya 'Kumar Sahab'
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अच्छा पाने के चक्कर में अपना सच्चा खो देते हैं
Divya 'Kumar Sahab'
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