तुझे भी ज़िंदगी से ग़म मिला है मुझे फिर कौन सा कुछ कम मिला है
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होश वालों को ख़बर क्या बे-ख़ुदी क्या चीज़ है इश्क़ कीजे फिर समझिए ज़िंदगी क्या चीज़ है
Nida Fazli
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हम को दिल से भी निकाला गया फिर शहर से भी हम को पत्थर से भी मारा गया फिर ज़हरस भी
Azm Shakri
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किसी गली में किराए पे घर लिया उस ने फिर उस गली में घरों के किराए बढ़ने लगे
Umair Najmi
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मुरली छूटी शंख बजा रास तजा फिर युद्ध सजा क्या पीछे क्या आगे है सब कुछ राधे राधे है
Zubair Ali Tabish
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मैं क्या कहूँ के मुझे सब्र क्यूँँ नहीं आता मैं क्या करूँँ के तुझे देखने की आदत है
Ahmad Faraz
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मर जाओगे जिस दिन तो शाने देगी दुनिया तुम को लेकिन जब तक ज़िंदा हो ता'ने देगी दुनिया तुम को
Daqiiq Jabaalii
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मुझ को जिन जिन लम्हों में तेरी ज़रूरत थी ना दोस्त हाँ उन्हीं लम्हों में तुम ने तन्हा छोड़ा था मुझे
Daqiiq Jabaalii
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तुम कुछ भी कहते रहते हो तुम भी औरों के जैसे हो
Daqiiq Jabaalii
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रोज़ मेरे सामने आती रही हो तुम रोज़ कुछ भी तो नहीं कह पाया मैं तुम सेे
Daqiiq Jabaalii
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ये शिकायत क्यूँँ नहीं मुझ को किसी से ये बताओ क्या मैं सच-मुच मर गया हूँ
Daqiiq Jabaalii
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