रोज़ मेरे सामने आती रही हो तुम रोज़ कुछ भी तो नहीं कह पाया मैं तुम सेे
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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अगर तुम हो तो घबराने की कोई बात थोड़ी है ज़रा सी बूँदा-बाँदी है बहुत बरसात थोड़ी है ये राह-ए-इश्क़ है इस में क़दम ऐसे ही उठते हैं मोहब्बत सोचने वालों के बस की बात थोड़ी है
Abrar Kashif
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बड़े नादान हो तुम भी ज़रा समझा करो बातें गले मिल कर जो रोती है बिछड़ कर कितना रोएगी
Ankita Singh
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किस लिए देखती हो आईना तुम तो ख़ुद से भी ख़ूब-सूरत हो
Jaun Elia
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तुम्हें हुस्न पर दस्तरस है मोहब्बत वोहब्बत बड़ा जानते हो तो फिर ये बताओ कि तुम उस की आँखों के बारे में क्या जानते हो ये जुग़राफ़िया फ़ल्सफ़ा साईकॉलोजी साइंस रियाज़ी वग़ैरा ये सब जानना भी अहम है मगर उस के घर का पता जानते हो
Tehzeeb Hafi
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ज़िक्र करता था जो दिन भर उस का हिज्र में मर गया शायर उस का सुनता रहता हूँ पशेमाँ हो कर ज़िक्र जब करते हैं दीगर उस का
Daqiiq Jabaalii
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ज़ीस्त की सम्त से ताज़ीर बराबर आई पर मुबीं होता नहीं ग़लती हमारी क्या है
Daqiiq Jabaalii
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तुम ने 'अमित' परियों को देखा है कभी परियों के जैसे ही वो दिखती थी अमित
Daqiiq Jabaalii
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मेरे क़रीब आ ज़रा नज़रें उतार दूँ ये ज़ुल्फ़ें क्या हैं ला तेरी किस्मत सँवार दूँ बैठी रहो यूँँ ही मेरी नज़रों के सामने तुम को निहारते हुए 'उम्रें गुज़ार दूँ
Daqiiq Jabaalii
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कुछ नहीं होगा रोने से सो मैं हँसता रहता हूँ अपनी क़िस्मत पर
Daqiiq Jabaalii
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