तुझ सेे पहले मैं ने उस को रक्खा नइँ रब को मुझ सेे यही शिकायत होती है
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ख़ुदी को कर बुलंद इतना कि हर तक़दीर से पहले ख़ुदा बंदे से ख़ुद पूछे बता तेरी रज़ा क्या है
Allama Iqbal
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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सब परिंदों से प्यार लूँगा मैं पेड़ का रूप धार लूँगा मैं तू निशाने पे आ भी जाए अगर कौन सा तीर मार लूँगा मैं
Tehzeeb Hafi
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तेरी सूरत से है आलम में बहारों को सबात तेरी आँखों के सिवा दुनिया में रक्खा क्या है
Faiz Ahmad Faiz
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क्या ख़बर कौन था वो, और मेरा क्या लगता था जिस सेे मिल कर मुझे, हर शख़्स बुरा लगता था
Tehzeeb Hafi
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टूट के भी मेरा दिल तेरा ही रहेगा टूट के भी तारे नभ के कहलाते हैं
Lalit Sachdeva
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मेरा दिल जब ज़ोर से रोने लगता है आँखें माँ से पहले तुझ को ढूँढती हैं
Lalit Sachdeva
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जब मैं ने तेरे बारे में सोचा है मुझ को तब बस शिव ही दिखने लगते हैं
Lalit Sachdeva
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हिज्र में रातें और काली हो जाती हैं हिज्र में चाँद खिड़की पर आता नहीं
Lalit Sachdeva
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क़ैद है मुझ सा ही कोई मुझ में भी जो है बाहर वो यक़ीनन मैं नहीं
Lalit Sachdeva
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