तुम्हारे साथ में जो गुज़री थी वो ज़िंदगी थी तुम्हारे बा'द ये क्या ज़िंदगी है? बिल्कुल नइँ ख़मोश रहने की आदत सी हो गई है मुझे भला ख़मोशी कभी बोलती है? बिल्कुल नइँ
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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शाख़ों से टूट जाएँ वो पत्ते नहीं हैं हम आँधी से कोई कह दे कि औक़ात में रहे
Rahat Indori
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सोचूँ तो सारी उम्र मोहब्बत में कट गई देखूँ तो एक शख़्स भी मेरा नहीं हुआ
Jaun Elia
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तेरी सूरत से है आलम में बहारों को सबात तेरी आँखों के सिवा दुनिया में रक्खा क्या है
Faiz Ahmad Faiz
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बंसी सब सुर त्यागे है, एक ही सुर में बाजे है हाल न पूछो मोहन का, सब कुछ राधे राधे है
Zubair Ali Tabish
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नज़दीक में रखा मुझे तन्हा नहीं किया कइयों ने मुझ को चाहा पर अपना नहीं किया तुम ने भी भेज दी मेरी जानिब मशकक़तें सुलझे हुए को उलझा के अच्छा नहीं किया
Amaan mirza
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इज़्ज़त करूँँगा मैं भी रहूँगा लिहाज़ में तू चीख़ता रहेगा अगर एक साज़ में महफ़िल में अच्छी शा'इरी की क्या बढ़ी डिमांड कव्वे भी ख़ुद को गिनने लगे सरफ़राज़ में
Amaan mirza
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ये सच है मुझ को दिखते नहीं तेरे ऐब-ओ-ख़म दिखने लगी हैं ख़ूबियाँ तू है मुझे पसंद
Amaan mirza
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आदतें सारी छोड़ दी मैं ने तुम तो मुझ को सुधार कर गई हो
Amaan mirza
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न मेरा है न किसी और के बाप का सूरज है इन दिनों तो बुलंदी पे आप का सूरज गुज़र रही है शब ए ग़म इस आस में तन्हा के एक दिन तो उगेगा मिलाप का सूरज
Amaan mirza
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