तुम्हारे शहर में तोहमत है ज़िंदा रहना भी जिन्हें अज़ीज़ थीं जानें वो मरते जाते हैं
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हम को दिल से भी निकाला गया फिर शहर से भी हम को पत्थर से भी मारा गया फिर ज़हरस भी
Azm Shakri
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किसी गली में किराए पे घर लिया उस ने फिर उस गली में घरों के किराए बढ़ने लगे
Umair Najmi
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क्यूँ डरें ज़िन्दगी में क्या होगा कुछ न होगा तो तजरबा होगा
Javed Akhtar
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सभी का ख़ून है शामिल यहाँ की मिट्टी में किसी के बाप का हिन्दुस्तान थोड़ी है
Rahat Indori
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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मुझ को उस की आँखों में कूदने की आदत है मैं तुम्हें बताऊँगा ख़ुद-कुशी के बारे में
Abbas Tabish
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मेरे आँसू मिरे अंदर ही गिरे रोने से जी और बोझल हो गया
Abbas Tabish
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मैं अपने आप में गहरा उतर गया शायद मिरे सफ़र से अलग हो गई रवानी मिरी
Abbas Tabish
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तोहमत उतार फेंकी लबादा बदल लिया ख़ुद को ज़रूरतों से ज़ियादा बदल लिया
Abbas Tabish
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क्या तमाशा है कि सब मुझ को बुरा कहते हैं और सब चाहते हैं मेरी तरह का होना
Abbas Tabish
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