तुम्हें पता है मिरे हाथ की लकीरों में तुम्हारे नाम के सारे हुरूफ़ बनते हैं
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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तुम्हें हुस्न पर दस्तरस है मोहब्बत वोहब्बत बड़ा जानते हो तो फिर ये बताओ कि तुम उस की आँखों के बारे में क्या जानते हो ये जुग़राफ़िया फ़ल्सफ़ा साईकॉलोजी साइंस रियाज़ी वग़ैरा ये सब जानना भी अहम है मगर उस के घर का पता जानते हो
Tehzeeb Hafi
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मेहरबाँ हम पे हर इक रात हुआ करती थी आँख लगते ही मुलाक़ात हुआ करती थी हिज्र की रात है और आँख में आँसू भी नहीं ऐसे मौसम में तो बरसात हुआ करती थी
Ismail Raaz
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शाख़ों से टूट जाएँ वो पत्ते नहीं हैं हम आँधी से कोई कह दे कि औक़ात में रहे
Rahat Indori
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सोचूँ तो सारी उम्र मोहब्बत में कट गई देखूँ तो एक शख़्स भी मेरा नहीं हुआ
Jaun Elia
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दे रहे हैं लोग मेरे दिल पे दस्तक बार बार दिल मगर ये कह रहा है सिर्फ़ तू और सिर्फ़ तू
Fareeha Naqvi
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"जो तू नहीं थी तो और भी थे, जो तू ना होगी तो और होंगे" किसी के दिल को जला के कहते हो, "मेरी जाँ! ये मुहावरा है"
Fareeha Naqvi
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ऐ मिरी ज़ात के सुकूँ आ जा थम न जाए कहीं जुनूँ आ जा इस से पहले कि मैं अज़िय्यत में अपनी आँखों को नोच लूँ आ जा
Fareeha Naqvi
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पूछने पर वो ये कह देगा, यूँँ ही शे'र हुए वैसे यूँँ ही कोई हरकत नहीं की जाती है
Fareeha Naqvi
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हम तोहफ़े में घड़ियाँ तो दे देते हैं एक दूजे को वक़्त नहीं दे पाते हैं आँखें ब्लैक एंड व्हाइट हैं तो फिर इन में रंग बिरंगे ख़्वाब कहाँ से आते हैं?
Fareeha Naqvi
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