"जो तू नहीं थी तो और भी थे, जो तू ना होगी तो और होंगे" किसी के दिल को जला के कहते हो, "मेरी जाँ! ये मुहावरा है"
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कुछ बात है कि हस्ती मिटती नहीं हमारी सदियों रहा है दुश्मन दौर-ए-ज़माँ हमारा
Allama Iqbal
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तुम्हें हम भी सताने पर उतर आएँ तो क्या होगा तुम्हारा दिल दुखाने पर उतर आएँ तो क्या होगा हमें बदनाम करते फिर रहे हो अपनी महफ़िल में अगर हम सच बताने पर उतर आएँ तो क्या होगा
Santosh S Singh
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देखो हम कोई वहशी नहीं दीवाने हैं तुम सेे बटन खुलवाने नहीं लगवाने हैं
Varun Anand
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हुआ ही क्या जो वो हमें मिला नहीं बदन ही सिर्फ़ एक रास्ता नहीं ये पहला इश्क़ है तुम्हारा सोच लो मेरे लिए ये रास्ता नया नहीं
Azhar Iqbal
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उसे किसी से मोहब्बत थी और वो मैं नहीं था ये बात मुझ सेे ज़ियादा उसे रुलाती थी
Ali Zaryoun
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दे रहे हैं लोग मेरे दिल पे दस्तक बार बार दिल मगर ये कह रहा है सिर्फ़ तू और सिर्फ़ तू
Fareeha Naqvi
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ऐ मिरी ज़ात के सुकूँ आ जा थम न जाए कहीं जुनूँ आ जा इस से पहले कि मैं अज़िय्यत में अपनी आँखों को नोच लूँ आ जा
Fareeha Naqvi
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पूछने पर वो ये कह देगा, यूँँ ही शे'र हुए वैसे यूँँ ही कोई हरकत नहीं की जाती है
Fareeha Naqvi
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हम तोहफ़े में घड़ियाँ तो दे देते हैं एक दूजे को वक़्त नहीं दे पाते हैं आँखें ब्लैक एंड व्हाइट हैं तो फिर इन में रंग बिरंगे ख़्वाब कहाँ से आते हैं?
Fareeha Naqvi
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तुम्हें पता है मिरे हाथ की लकीरों में तुम्हारे नाम के सारे हुरूफ़ बनते हैं
Fareeha Naqvi
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