तुम सेे इक दिन कहीं मिलेंगे हम ख़र्च ख़ुद को तभी करेंगे हम धूप निकली है तेरी बातों की आज छत पर पड़े रहेंगे हम
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अगर तुम हो तो घबराने की कोई बात थोड़ी है ज़रा सी बूँदा-बाँदी है बहुत बरसात थोड़ी है ये राह-ए-इश्क़ है इस में क़दम ऐसे ही उठते हैं मोहब्बत सोचने वालों के बस की बात थोड़ी है
Abrar Kashif
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बड़े नादान हो तुम भी ज़रा समझा करो बातें गले मिल कर जो रोती है बिछड़ कर कितना रोएगी
Ankita Singh
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ज़रा ठहरो कि शब फीकी बहुत है तुम्हें घर जाने की जल्दी बहुत है ज़रा नज़दीक आ कर बैठ जाओ तुम्हारे शहर में सर्दी बहुत है
Zubair Ali Tabish
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तुम्हें हुस्न पर दस्तरस है मोहब्बत वोहब्बत बड़ा जानते हो तो फिर ये बताओ कि तुम उस की आँखों के बारे में क्या जानते हो ये जुग़राफ़िया फ़ल्सफ़ा साईकॉलोजी साइंस रियाज़ी वग़ैरा ये सब जानना भी अहम है मगर उस के घर का पता जानते हो
Tehzeeb Hafi
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कुछ न रह सका जहाँ विरानियाँ तो रह गईं तुम चले गए तो क्या कहानियाँ तो रह गईं
Khalil Ur Rehman Qamar
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वो जो पागल था अब वो कैसा है ऐसे वो पूछता है हाल मेरा
Swapnil Tiwari
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जलते दिए सा इक बोसा रख कर उस ने चमक बढ़ा दी है मेरी पेशानी की
Swapnil Tiwari
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गली में बैठे हैं उस की नज़र जमाए हुए हमारे बस में फ़क़त इंतिज़ार करना है
Swapnil Tiwari
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ये वही हूँ मैं वो ही हारा हुआ फिर वही दिन है वो गुज़ारा हुआ कैसे अपनी तरफ़ चला आया मैं किसी और का पुकारा हुआ
Swapnil Tiwari
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रोना नहीं मुझे मुझे रहने दे बस उदास तू बैठ मेरे पास मगर यूँँ लिपट नहीं
Swapnil Tiwari
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