tu ne hi to chaha tha ki milta rahun tujh se teri yahi marzi hai to achchha nahin milta
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मैं क्या कहूँ के मुझे सब्र क्यूँँ नहीं आता मैं क्या करूँँ के तुझे देखने की आदत है
Ahmad Faraz
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वो ज़माना गुज़र गया कब का था जो दीवाना मर गया कब का
Javed Akhtar
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हम को दिल से भी निकाला गया फिर शहर से भी हम को पत्थर से भी मारा गया फिर ज़हरस भी
Azm Shakri
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पूछ लेते वो बस मिज़ाज मिरा कितना आसान था इलाज मिरा
Fahmi Badayuni
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सफ़र में आख़िरी पत्थर के बा'द आएगा मज़ा तो यार दिसंबर के बा'द आएगा
Rahat Indori
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रोज़ मिलने पे भी लगता था कि जुग बीत गए इश्क़ में वक़्त का एहसास नहीं रहता है
Ahmad Mushtaq
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हम अपनी धूप में बैठे हैं 'मुश्ताक़' हमारे साथ है साया हमारा
Ahmad Mushtaq
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यार सब जम्अ' हुए रात की ख़ामोशी में कोई रो कर तो कोई बाल बना कर आया
Ahmad Mushtaq
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मैं बहुत ख़ुश था कड़ी धूप के सन्नाटे में क्यूँँ तेरी याद का बादल मेरे सर पर आया
Ahmad Mushtaq
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नए दीवानों को देखें तो ख़ुशी होती है हम भी ऐसे ही थे जब आए थे वीराने में
Ahmad Mushtaq
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