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नए दीवानों को देखें तो ख़ुशी होती है हम भी ऐसे ही थे जब आए थे वीराने में

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रातें किसी याद में कटती हैं और दिन दफ़्तर खा जाता है दिल जीने पर माएल होता है तो मौत का डर खा जाता है सच पूछो तो 'तहज़ीब हाफ़ी' मैं ऐसे दोस्त से आज़िज़ हूँ मिलता है तो बात नहीं करता और फोन पे सर खा जाता है

Tehzeeb Hafi

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कोई इतना प्यारा कैसे हो सकता है फिर सारे का सारा कैसे हो सकता है तुझ सेे जब मिल कर भी उदासी कम नहीं होती तेरे बग़ैर गुज़ारा कैसे हो सकता है

Jawwad Sheikh

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कोई समुंदर, कोई नदी होती कोई दरिया होता हम जितने प्यासे थे हमारा एक गिलास से क्या होता ता'ने देने से और हम पे शक करने से बेहतर था गले लगा के तुम ने हिजरत का दुख बाट लिया होता

Tehzeeb Hafi

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इतना ऊँचा उड़ना भी कुछ ठीक नहीं पाबंदी लग जाती है परवाज़ों पर तुझ को छू कर और किसी की चाह रखे हैरत है और लानत है ऐसे हाथों पर

Varun Anand

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तुझ को छू कर और किसी की चाह रखें हैरत है और लानत ऐसे हाथों पर

Varun Anand

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