उस से मिले ज़माना हुआ लेकिन आज भी दिल से दुआ निकलती है ख़ुश हो जहाँ भी हो
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तुम्हें हम भी सताने पर उतर आएँ तो क्या होगा तुम्हारा दिल दुखाने पर उतर आएँ तो क्या होगा हमें बदनाम करते फिर रहे हो अपनी महफ़िल में अगर हम सच बताने पर उतर आएँ तो क्या होगा
Santosh S Singh
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परों को खोल ज़माना उड़ान देखता है ज़मीं पे बैठ के क्या आसमान देखता है
Shakeel Azmi
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दिल ना-उमीद तो नहीं नाकाम ही तो है लंबी है ग़म की शाम मगर शाम ही तो है
Faiz Ahmad Faiz
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मिले किसी से गिरे जिस भी जाल पर मेरे दोस्त मैं उस को छोड़ चुका उस के हाल पर मेरे दोस्त ज़मीं पे सबका मुक़द्दर तो मेरे जैसा नहीं किसी के साथ तो होगा वो कॉल पर मेरे दोस्त
Ali Zaryoun
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वो ज़माना गुज़र गया कब का था जो दीवाना मर गया कब का
Javed Akhtar
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आग अपने ही लगा सकते हैं ग़ैर तो सिर्फ़ हवा देते हैं
Mohammad Alvi
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हाए वो लोग जो देखे भी नहीं याद आएँ तो रुला देते हैं
Mohammad Alvi
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अब तो चुप-चाप शाम आती है पहले चिड़ियों के शोर होते थे
Mohammad Alvi
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सदियों से किनारे पे खड़ा सूख रहा है इस शहर को दरिया में गिरा देना चाहिए
Mohammad Alvi
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गुल-दान में गुलाब की कलियाँ महक उठीं कुर्सी ने उस को देख के आग़ोश वा किया
Mohammad Alvi
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