हाए वो लोग जो देखे भी नहीं याद आएँ तो रुला देते हैं
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हुई मुद्दत कि 'ग़ालिब' मर गया पर याद आता है वो हर इक बात पर कहना कि यूँँ होता तो क्या होता
Mirza Ghalib
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उस को फ़ुर्सत नहीं मिलती कि पलट कर देखे हम ही दीवाने हैं दीवाने बने रहते हैं
Waseem Barelvi
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कुछ बात है कि हस्ती मिटती नहीं हमारी सदियों रहा है दुश्मन दौर-ए-ज़माँ हमारा
Allama Iqbal
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हमारे बा'द तेरे इश्क़ में नए लड़के बदन तो चू मेंगे ज़ुल्फ़ें नहीं सँवारेंगे
Vikram Gaur Vairagi
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तुम्हें हम भी सताने पर उतर आएँ तो क्या होगा तुम्हारा दिल दुखाने पर उतर आएँ तो क्या होगा हमें बदनाम करते फिर रहे हो अपनी महफ़िल में अगर हम सच बताने पर उतर आएँ तो क्या होगा
Santosh S Singh
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आग अपने ही लगा सकते हैं ग़ैर तो सिर्फ़ हवा देते हैं
Mohammad Alvi
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नया साल दीवार पर टाँग दे पुराने बरस का कैलेंडर गिरा
Mohammad Alvi
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उस से मिले ज़माना हुआ लेकिन आज भी दिल से दुआ निकलती है ख़ुश हो जहाँ भी हो
Mohammad Alvi
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सदियों से किनारे पे खड़ा सूख रहा है इस शहर को दरिया में गिरा देना चाहिए
Mohammad Alvi
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'अल्वी' ये मो'जिज़ा है दिसम्बर की धूप का सारे मकान शहर के धोए हुए से हैं
Mohammad Alvi
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