'अल्वी' ये मो'जिज़ा है दिसम्बर की धूप का सारे मकान शहर के धोए हुए से हैं
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धूप में निकलो घटाओं में नहा कर देखो ज़िंदगी क्या है किताबों को हटा कर देखो
Nida Fazli
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ख़ुद से भी मिल न सको, इतने पास मत होना इश्क़ तो करना, मगर देवदास मत होना देखना, चाहना, फिर माँगना, या खो देना ये सारे खेल हैं, इन में उदास मत होना
Kumar Vishwas
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धूप पड़े उस पर तो तुम बादल बन जाना अब वो मिलने आए तो उस को घर ठहराना। तुम को दूर से देखते देखते गुज़र रही है मर जाना पर किसी गरीब के काम न आना।
Tehzeeb Hafi
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ख़ाली पड़ा है और उदासी भरा है दिल सो लोग इस मकान से आगे निकल गए
Ankit Maurya
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छोड़ो दुनिया की परवाहें, करो मोहब्बत मुश्किल हों कितनी भी राहें, करो मोहब्बत सुन कर देखो सारे मंदिर यही कहेंगे यही कहेंगी सब दरगाहें, करो मोहब्बत
Bhaskar Shukla
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परिंदे दूर फ़ज़ाओं में खो गए 'अल्वी' उजाड़ उजाड़ दरख़्तों पे आशियाने थे
Mohammad Alvi
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नया साल दीवार पर टाँग दे पुराने बरस का कैलेंडर गिरा
Mohammad Alvi
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उस से मिले ज़माना हुआ लेकिन आज भी दिल से दुआ निकलती है ख़ुश हो जहाँ भी हो
Mohammad Alvi
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आग अपने ही लगा सकते हैं ग़ैर तो सिर्फ़ हवा देते हैं
Mohammad Alvi
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खिड़कियों से झाँकती है रौशनी बत्तियाँ जलती हैं घर घर रात में
Mohammad Alvi
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