खिड़कियों से झाँकती है रौशनी बत्तियाँ जलती हैं घर घर रात में
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हम वो हैं जो ख़ुदा को भूल गए तुम मेरी जान किस गुमान में हो
Jaun Elia
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ये कहना था उन से मोहब्बत है मुझ को ये कहने में मुझ को ज़माने लगे हैं
Khumar Barabankvi
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मेरे आँसू नहीं थम रहे कि वो मुझ सेे जुदा हो गया और तुम कह रहे हो कि छोड़ो अब ऐसा भी क्या हो गया मय-कदों में मेरी लाइनें पढ़ते फिरते हैं लोग मैं ने जो कुछ भी पी कर कहा फ़लसफ़ा हो गया
Tehzeeb Hafi
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हम भी दरिया हैं हमें अपना हुनर मालूम है जिस तरफ़ भी चल पड़ेंगे रास्ता हो जाएगा
Bashir Badr
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जो ख़ानदानी रईस हैं वो मिज़ाज रखते हैं नर्म अपना तुम्हारा लहजा बता रहा है, तुम्हारी दौलत नई नई है
Shabeena Adeeb
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आग अपने ही लगा सकते हैं ग़ैर तो सिर्फ़ हवा देते हैं
Mohammad Alvi
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नया साल दीवार पर टाँग दे पुराने बरस का कैलेंडर गिरा
Mohammad Alvi
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उस से मिले ज़माना हुआ लेकिन आज भी दिल से दुआ निकलती है ख़ुश हो जहाँ भी हो
Mohammad Alvi
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परिंदे दूर फ़ज़ाओं में खो गए 'अल्वी' उजाड़ उजाड़ दरख़्तों पे आशियाने थे
Mohammad Alvi
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'अल्वी' ये मो'जिज़ा है दिसम्बर की धूप का सारे मकान शहर के धोए हुए से हैं
Mohammad Alvi
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