उस का ग़म मुझ पर तारी है अब तक हस्ती ये जारी है आमद हो जानी है उस की जिस के आने तैयारी है
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प्यार दो बार थोड़ी होता है हो तो फिर प्यार थोड़ी होता है यही बेहतर है तुम उसे रोको मुझ सेे इनकार थोड़ी होता है
Zubair Ali Tabish
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तू मोहब्बत से कोई चाल तो चल हार जाने का हौसला है मुझे
Ahmad Faraz
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ये मुझे चैन क्यूँ नहीं पड़ता एक ही शख़्स था जहान में क्या
Jaun Elia
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मैं क्या कहूँ के मुझे सब्र क्यूँँ नहीं आता मैं क्या करूँँ के तुझे देखने की आदत है
Ahmad Faraz
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क्या ख़बर कौन था वो, और मेरा क्या लगता था जिस सेे मिल कर मुझे, हर शख़्स बुरा लगता था
Tehzeeb Hafi
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तुम ने मुड़कर भी देखा नहीं था हमें देखो अब किस तरह हम हैं बिखरे हुए
Hrishita Singh
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तुम न आए फ़ज़ा भी ये रूखी सी थी तुम जो आओ तो गीतों को भी सुर मिले जब निहारा था तुम ने तो सँवरी थी मैं फेरी जब से नज़र तो उजड़ने लगे
Hrishita Singh
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वो अर्से के बा'द फिर मिले मुझ को यूँँ सफ़्हे में गुलाब जैसे पाया जाए
Hrishita Singh
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मेरी दुनिया जिस में सिमट जाती थी तो अब उस के कानों में बाली न हो
Hrishita Singh
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मेरी क़िस्मत में तो बस इक ही दरवाज़ा है और वो भी बस तेरे आने से ही खुलता है
Hrishita Singh
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