तुम न आए फ़ज़ा भी ये रूखी सी थी तुम जो आओ तो गीतों को भी सुर मिले जब निहारा था तुम ने तो सँवरी थी मैं फेरी जब से नज़र तो उजड़ने लगे
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अगर तुम हो तो घबराने की कोई बात थोड़ी है ज़रा सी बूँदा-बाँदी है बहुत बरसात थोड़ी है ये राह-ए-इश्क़ है इस में क़दम ऐसे ही उठते हैं मोहब्बत सोचने वालों के बस की बात थोड़ी है
Abrar Kashif
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बड़े नादान हो तुम भी ज़रा समझा करो बातें गले मिल कर जो रोती है बिछड़ कर कितना रोएगी
Ankita Singh
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उस की जुल्फ़ें उदास हो जाए इस-क़दर रौशनी भी ठीक नहीं तुम ने नाराज़ होना छोड़ दिया इतनी नाराज़गी भी ठीक नहीं
Fahmi Badayuni
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किस लिए देखती हो आईना तुम तो ख़ुद से भी ख़ूब-सूरत हो
Jaun Elia
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हज़ार इश्क़ करो लेकिन इतना ध्यान रहे कि तुम को पहली मोहब्बत की बद-दुआ न लगे
Abbas Tabish
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ये उलझनें मुझे ही खा रही हैं अब ख़ुद को ही सताए फिर रहे हैं
Hrishita Singh
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तुम ने मुड़कर भी देखा नहीं था हमें देखो अब किस तरह हम हैं बिखरे हुए
Hrishita Singh
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हम उस का ग़म छुपाए फिर रहे हैं जिस से ये दिल लगाए फिर रहे हैं
Hrishita Singh
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मेरी दुनिया जिस में सिमट जाती थी तो अब उस के कानों में बाली न हो
Hrishita Singh
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जाने यहाँ मिलते हैं कैसे कैसे लोग कुछ अलहदा कुछ हम सेे मिलते जुलते लोग
Hrishita Singh
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