ये उलझनें मुझे ही खा रही हैं अब ख़ुद को ही सताए फिर रहे हैं
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शायद मुझे किसी से मोहब्बत नहीं हुई लेकिन यक़ीन सब को दिलाता रहा हूँ मैं
Jaun Elia
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बिछड़ कर उस का दिल लग भी गया तो क्या लगेगा वो थक जाएगा और मेरे गले से आ लगेगा मैं मुश्किल में तुम्हारे काम आऊँ या ना आऊँ मुझे आवाज़ दे लेना तुम्हें अच्छा लगेगा
Tehzeeb Hafi
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मुझ से मत पूछो के उस शख़्स में क्या अच्छा है अच्छे अच्छों से मुझे मेरा बुरा अच्छा है किस तरह मुझ से मुहब्बत में कोई जीत गया ये न कह देना के बिस्तर में बड़ा अच्छा है
Tehzeeb Hafi
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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हम वो हैं जो ख़ुदा को भूल गए तुम मेरी जान किस गुमान में हो
Jaun Elia
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याँ दानाई के सब दरवाज़े भी खुलते हैं याँ सब को इक जैसा ही नश्शा भी होता है
Hrishita Singh
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इक जुस्तजू दीदार के तेरे सिवा कुछ भी नहीं ऐसा नहीं उन रास्तों पर अब रुका मैं ही नहीं ज़द में किसी दीवार के उलझी रही हो रौशनी कमरे में मेरे रौशनी भी अब बसर करती नहीं
Hrishita Singh
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तुम ने मुड़कर भी देखा नहीं था हमें देखो अब किस तरह हम हैं बिखरे हुए
Hrishita Singh
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अब दिल-लगी हुई है ऐसी सब सेे हर शख़्स आज़माए फिर रहे हैं
Hrishita Singh
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तुम न आए फ़ज़ा भी ये रूखी सी थी तुम जो आओ तो गीतों को भी सुर मिले जब निहारा था तुम ने तो सँवरी थी मैं फेरी जब से नज़र तो उजड़ने लगे
Hrishita Singh
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