इक जुस्तजू दीदार के तेरे सिवा कुछ भी नहीं ऐसा नहीं उन रास्तों पर अब रुका मैं ही नहीं ज़द में किसी दीवार के उलझी रही हो रौशनी कमरे में मेरे रौशनी भी अब बसर करती नहीं
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बिछड़ गए तो ये दिल उम्र भर लगेगा नहीं लगेगा लगने लगा है मगर लगेगा नहीं नहीं लगेगा उसे देख कर मगर ख़ुश है मैं ख़ुश नहीं हूँ मगर देख कर लगेगा नहीं
Umair Najmi
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शाख़ों से टूट जाएँ वो पत्ते नहीं हैं हम आँधी से कोई कह दे कि औक़ात में रहे
Rahat Indori
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तेरी सूरत से है आलम में बहारों को सबात तेरी आँखों के सिवा दुनिया में रक्खा क्या है
Faiz Ahmad Faiz
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शायद मुझे किसी से मोहब्बत नहीं हुई लेकिन यक़ीन सब को दिलाता रहा हूँ मैं
Jaun Elia
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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ये उलझनें मुझे ही खा रही हैं अब ख़ुद को ही सताए फिर रहे हैं
Hrishita Singh
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तुम ने मुड़कर भी देखा नहीं था हमें देखो अब किस तरह हम हैं बिखरे हुए
Hrishita Singh
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मैं तो दरिया ही दरिया रहा करती थी ख़ुद में बस तेरी इक ही नज़र ने तो मुझ को भी साहिल किया
Hrishita Singh
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और सब कुछ हासिल हो जाए फिर भी कुछ तो अक्सर बाक़ी रह जाता है
Hrishita Singh
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याँ दानाई के सब दरवाज़े भी खुलते हैं याँ सब को इक जैसा ही नश्शा भी होता है
Hrishita Singh
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