मैं तो दरिया ही दरिया रहा करती थी ख़ुद में बस तेरी इक ही नज़र ने तो मुझ को भी साहिल किया
Related Sher
ख़ुदी को कर बुलंद इतना कि हर तक़दीर से पहले ख़ुदा बंदे से ख़ुद पूछे बता तेरी रज़ा क्या है
Allama Iqbal
471 likes
कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
521 likes
शाख़ों से टूट जाएँ वो पत्ते नहीं हैं हम आँधी से कोई कह दे कि औक़ात में रहे
Rahat Indori
435 likes
तेरी सूरत से है आलम में बहारों को सबात तेरी आँखों के सिवा दुनिया में रक्खा क्या है
Faiz Ahmad Faiz
401 likes
सोचूँ तो सारी उम्र मोहब्बत में कट गई देखूँ तो एक शख़्स भी मेरा नहीं हुआ
Jaun Elia
545 likes
More from Hrishita Singh
ये उलझनें मुझे ही खा रही हैं अब ख़ुद को ही सताए फिर रहे हैं
Hrishita Singh
0 likes
वो अर्से के बा'द फिर मिले मुझ को यूँँ सफ़्हे में गुलाब जैसे पाया जाए
Hrishita Singh
0 likes
जाने यहाँ मिलते हैं कैसे कैसे लोग कुछ अलहदा कुछ हम सेे मिलते जुलते लोग
Hrishita Singh
0 likes
मेरी सुनो तो तुम्हें एक कहानी सुनाऊँ मेरी कहानी के किरदार अभी ज़िंदा हैं
Hrishita Singh
1 likes
किस के ग़म में ये चेहरा मुरझा गया है किस के धोके में फिर ये दिल आ गया है
Hrishita Singh
0 likes
Similar Writers
Our suggestions based on Hrishita Singh.
Similar Moods
More moods that pair well with Hrishita Singh's sher.







