मेरी सुनो तो तुम्हें एक कहानी सुनाऊँ मेरी कहानी के किरदार अभी ज़िंदा हैं
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मेरी तन्हाई देखेंगे तो हैरत ही करेंगे लोग मोहब्बत छोड़ देंगे या मोहब्बत ही करेंगे लोग
Ismail Raaz
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हाथ ख़ाली है तेरे शहर से जाते जाते जान होती तो मेरी जान लुटाते जाते
Rahat Indori
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मैं जब मर जाऊँ तो मेरी अलग पहचान लिख देना लहू से मेरी पेशानी पे हिंदुस्तान लिख देना
Rahat Indori
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कोई शहर था जिस की एक गली मेरी हर आहट पहचानती थी मेरे नाम का इक दरवाज़ा था इक खिड़की मुझ को जानती थी
Ali Zaryoun
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ग़म-ए-फ़ुर्क़त का शिकवा करने वाली मेरी मौजूदगी में सो रही है
Jaun Elia
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ये उलझनें मुझे ही खा रही हैं अब ख़ुद को ही सताए फिर रहे हैं
Hrishita Singh
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तुम न आए फ़ज़ा भी ये रूखी सी थी तुम जो आओ तो गीतों को भी सुर मिले जब निहारा था तुम ने तो सँवरी थी मैं फेरी जब से नज़र तो उजड़ने लगे
Hrishita Singh
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मैं तो कमज़र्फ़ हूँ और तू है ज़की लोगों ने मेरा सच फिर तो बातिल किया
Hrishita Singh
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उस का ग़म मुझ पर तारी है अब तक हस्ती ये जारी है आमद हो जानी है उस की जिस के आने तैयारी है
Hrishita Singh
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मेरी दुनिया जिस में सिमट जाती थी तो अब उस के कानों में बाली न हो
Hrishita Singh
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