मैं तो कमज़र्फ़ हूँ और तू है ज़की लोगों ने मेरा सच फिर तो बातिल किया
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मैं अगर अपनी जवानी के सुना दूँ क़िस्से ये जो लौंडे हैं मेरे पाँव दबाने लग जाए
Mehshar Afridi
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मैं चाहता हूँ मोहब्बत मेरा वो हाल करे कि ख़्वाब में भी दोबारा कभी मजाल न हो
Jawwad Sheikh
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निगाहें फेर ली घबरा के मैं ने वो तुम से ख़ूब-सूरत लग रही थी
Fahmi Badayuni
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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उसे किसी से मोहब्बत थी और वो मैं नहीं था ये बात मुझ सेे ज़ियादा उसे रुलाती थी
Ali Zaryoun
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याँ दानाई के सब दरवाज़े भी खुलते हैं याँ सब को इक जैसा ही नश्शा भी होता है
Hrishita Singh
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तुम ने मुड़कर भी देखा नहीं था हमें देखो अब किस तरह हम हैं बिखरे हुए
Hrishita Singh
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यूँँ तो रहते हैं ख़ुद से बे-ख़बर भी है अपने पास पर ज़ौक़-ए-नज़र भी
Hrishita Singh
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देवता हो न जाए यहाँ हम भी फिर इस दफ़ा हम ने पत्थर को भी दिल किया
Hrishita Singh
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ये उलझनें मुझे ही खा रही हैं अब ख़ुद को ही सताए फिर रहे हैं
Hrishita Singh
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