यूँँ तो रहते हैं ख़ुद से बे-ख़बर भी है अपने पास पर ज़ौक़-ए-नज़र भी
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मेरे आँसू नहीं थम रहे कि वो मुझ सेे जुदा हो गया और तुम कह रहे हो कि छोड़ो अब ऐसा भी क्या हो गया मय-कदों में मेरी लाइनें पढ़ते फिरते हैं लोग मैं ने जो कुछ भी पी कर कहा फ़लसफ़ा हो गया
Tehzeeb Hafi
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हम भी दरिया हैं हमें अपना हुनर मालूम है जिस तरफ़ भी चल पड़ेंगे रास्ता हो जाएगा
Bashir Badr
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जो ख़ानदानी रईस हैं वो मिज़ाज रखते हैं नर्म अपना तुम्हारा लहजा बता रहा है, तुम्हारी दौलत नई नई है
Shabeena Adeeb
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देखो हम कोई वहशी नहीं दीवाने हैं तुम सेे बटन खुलवाने नहीं लगवाने हैं
Varun Anand
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मर चुका है दिल मगर ज़िंदा हूँ मैं ज़हर जैसी कुछ दवाएँ चाहिए पूछते हैं आप आप अच्छे तो हैं जी मैं अच्छा हूँ दुआएँ चाहिए
Jaun Elia
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याँ दानाई के सब दरवाज़े भी खुलते हैं याँ सब को इक जैसा ही नश्शा भी होता है
Hrishita Singh
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वो अर्से के बा'द फिर मिले मुझ को यूँँ सफ़्हे में गुलाब जैसे पाया जाए
Hrishita Singh
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हम उस का ग़म छुपाए फिर रहे हैं जिस से ये दिल लगाए फिर रहे हैं
Hrishita Singh
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ये उलझनें मुझे ही खा रही हैं अब ख़ुद को ही सताए फिर रहे हैं
Hrishita Singh
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इक जुस्तजू दीदार के तेरे सिवा कुछ भी नहीं ऐसा नहीं उन रास्तों पर अब रुका मैं ही नहीं ज़द में किसी दीवार के उलझी रही हो रौशनी कमरे में मेरे रौशनी भी अब बसर करती नहीं
Hrishita Singh
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