उस का कहना था साथ रहना है उस की बातों पे ख़ूब हँसता हूँ
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हुई मुद्दत कि 'ग़ालिब' मर गया पर याद आता है वो हर इक बात पर कहना कि यूँँ होता तो क्या होता
Mirza Ghalib
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मिले किसी से गिरे जिस भी जाल पर मेरे दोस्त मैं उस को छोड़ चुका उस के हाल पर मेरे दोस्त ज़मीं पे सबका मुक़द्दर तो मेरे जैसा नहीं किसी के साथ तो होगा वो कॉल पर मेरे दोस्त
Ali Zaryoun
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बात ऐसी भी भला आप में क्या रक्खी है इक दिवाने ने ज़मीं सर पे उठा रक्खी है इत्तिफ़ाक़न कहीं मिल जाए तो कहना उस सेे तेरे शाइ'र ने बड़ी धूम मचा रक्खी है
Ismail Raaz
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गर बाज़ी इश्क़ की बाज़ी है, जो चाहो लगा दो डर कैसा गर जीत गए तो क्या कहना, हारे भी तो बाज़ी मात नहीं
Faiz Ahmad Faiz
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दबी कुचली हुई सब ख़्वाहिशों के सर निकल आए ज़रा पैसा हुआ तो च्यूँँटियों के पर निकल आए अभी उड़ते नहीं तो फ़ाख़्ता के साथ हैं बच्चे अकेला छोड़ देंगे माँ को जिस दिन पर निकल आए
Mehshar Afridi
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ये ग़म है तेरे ना होते हुए भी मुस्कुराना है हवा भी साथ रखनी है दियों को भी जलाना है
Prashant Sitapuri
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ये मान लिया मैं ने बदला हूँ बहुत लेकिन ये ठीक है क्या पहले जैसी ही रही हो तुम
Prashant Sitapuri
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तुम्हें कुछ दे नहीं सकता मगर फिर भी फ़कीरी में निकलती है दुआ मुझ सेे
Prashant Sitapuri
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वो कक्षा दस की यादें वो हिंदी का पहला पेपर वो लंबी पटरी वाली लड़की याद बहुत आती है मुझ सेे प्यार बहुत है तो अपने आप ही जाने वो क्यूँँ कह दूँ यारों मुझ को उस की याद बहुत आती है
Prashant Sitapuri
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वबा का दौर है सहमा हुआ है आदमी मौला सभी हैं खो रहे अपने रहम कुछ तो ख़ुदा करिए
Prashant Sitapuri
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