उस के अभी दिखता नहीं उन गेसुओं में कोई ख़म दोशीज़गी-ए-हुस्न की अब क्या करे ता'रीफ़ हम
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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शाख़ों से टूट जाएँ वो पत्ते नहीं हैं हम आँधी से कोई कह दे कि औक़ात में रहे
Rahat Indori
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तेरी सूरत से है आलम में बहारों को सबात तेरी आँखों के सिवा दुनिया में रक्खा क्या है
Faiz Ahmad Faiz
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सोचूँ तो सारी उम्र मोहब्बत में कट गई देखूँ तो एक शख़्स भी मेरा नहीं हुआ
Jaun Elia
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ये मुझे चैन क्यूँ नहीं पड़ता एक ही शख़्स था जहान में क्या
Jaun Elia
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याज़ कोई भी रहे दीवानगी भी चाहिए मसअले हालात वर्ना आज भी प्रतिकूल हैं
Manohar Shimpi
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सच बताओं मर्सिया-ख़्वानी किसे मालूम है आँख से बहता हुआ पानी किसे मालूम है
Manohar Shimpi
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ज़िक्र जब भी हो गुनाहों का 'मनोहर' फ़ैसला तो फिर अदालत ही करेगी
Manohar Shimpi
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शराब-ए-हक़ीक़त किसे ही बताता वो जाम-ए-इनायत कहाँ फिर छुपाता
Manohar Shimpi
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तेरे ही किसी कोई फ़ैसले से पड़ी कभी वो दरार थी न समझ सके उसे इक झलक वो निगाह ख़ूब शरार थी
Manohar Shimpi
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