उस्ताद के एहसान का कर शुक्र 'मुनीर' आज की अहल-ए-सुख़न ने तिरी ता'रीफ़ बड़ी बात
sherKuch Alfaaz
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ये शुक्र है कि मिरे पास तेरा ग़म तो रहा वगर्ना ज़िंदगी भर को रुला दिया होता
Gulzar
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हम पे एहसान हैं उदासी के मुस्कुराएँ तो शर्म आती है
Varun Anand
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अब मुझे मानें न मानें ऐ 'हफ़ीज़' मानते हैं सब मिरे उस्ताद को
Hafeez Jalandhari
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ज़रा देर बैठे थे तन्हाई में तिरी याद आँखें दुखाने लगी
Adil Mansuri
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मिरी आरज़ू का हासिल तिरे लब की मुस्कुराहट हैं क़ुबूल मुझ को सब ग़म तिरी इक ख़ुशी के बदले
Kashif Adeeb Makanpuri
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