वक़्त की अब चोट हम को रास ऐसे आ गई है जबसे जीने की नई फिर आस जैसे आ गई है ज़िंदगी ज़िंदा रहे गर फूल तब पाएँगे खिल बात हम में ऐसी देखो यार कैसे आ गई है
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हम भी दरिया हैं हमें अपना हुनर मालूम है जिस तरफ़ भी चल पड़ेंगे रास्ता हो जाएगा
Bashir Badr
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रातें किसी याद में कटती हैं और दिन दफ़्तर खा जाता है दिल जीने पर माएल होता है तो मौत का डर खा जाता है सच पूछो तो 'तहज़ीब हाफ़ी' मैं ऐसे दोस्त से आज़िज़ हूँ मिलता है तो बात नहीं करता और फोन पे सर खा जाता है
Tehzeeb Hafi
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हुआ ही क्या जो वो हमें मिला नहीं बदन ही सिर्फ़ एक रास्ता नहीं ये पहला इश्क़ है तुम्हारा सोच लो मेरे लिए ये रास्ता नया नहीं
Azhar Iqbal
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सियाह रात नहीं लेती नाम ढलने का यही तो वक़्त है सूरज तिरे निकलने का
Shahryar
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अब उस सेे दोस्ती है जिस सेे कल मुहब्बत थी अब इस सेे ज़्यादा बुरा वक़्त कुछ नहीं है दोस्त
Vishal Singh Tabish
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कहो हमें भला बुरा या कुछ भी तुम यहाँ मगर कहे जो सच वो आइना भी पास हो
Lalit Mohan Joshi
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फ़र्द-ए-बशर हो तुम फ़क़त क्यूँँ बोलते हो तुम सक़त मग़रूर हो ख़ुद इल्म में ये ऐब क्यूँँ लाए फ़क़त
Lalit Mohan Joshi
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ज़बाँ मीठी रखो या तल्ख़ तुम मगर सच कहने की आदत रखो
Lalit Mohan Joshi
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प्यार की सब को ही तलब है यहाँ तो पर कभी क्या भूखे को खाना मिला है
Lalit Mohan Joshi
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पाप का इक मैं दरिया ही हूँ डूबकर आप तर जाइए
Lalit Mohan Joshi
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