वो रस्ते भी ज़िन्दगी को गए कुछ सिखा के जिस रस्ते से हम गुज़रना नहीं चाहते थे
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कुछ बात है कि हस्ती मिटती नहीं हमारी सदियों रहा है दुश्मन दौर-ए-ज़माँ हमारा
Allama Iqbal
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हम भी दरिया हैं हमें अपना हुनर मालूम है जिस तरफ़ भी चल पड़ेंगे रास्ता हो जाएगा
Bashir Badr
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क्या ख़बर कौन था वो, और मेरा क्या लगता था जिस सेे मिल कर मुझे, हर शख़्स बुरा लगता था
Tehzeeb Hafi
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मेरे आँसू नहीं थम रहे कि वो मुझ सेे जुदा हो गया और तुम कह रहे हो कि छोड़ो अब ऐसा भी क्या हो गया मय-कदों में मेरी लाइनें पढ़ते फिरते हैं लोग मैं ने जो कुछ भी पी कर कहा फ़लसफ़ा हो गया
Tehzeeb Hafi
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कुछ न रह सका जहाँ विरानियाँ तो रह गईं तुम चले गए तो क्या कहानियाँ तो रह गईं
Khalil Ur Rehman Qamar
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ये धुआँ सिगरेट का बिखरी किताबें बंद पर्दे दिख रहा है जैसा मेरा कमरा तो ऐसा नहीं था
Abhay Aadiv
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ज़िम्मेदारी जीने ही देती नहीं है ज़िंदगी भर जीनी पड़ती हैं बहुत सी ज़िंदगी इक ज़िंदगी में
Abhay Aadiv
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टूट कर बिखरने नईं दिया उस ने मुझे जोड़कर कुछ ऐसे ही रखा उस ने मुझे
Abhay Aadiv
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होता है दिल उदास तो करें क्या वो न हो आस पास तो करें क्या
Abhay Aadiv
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मुझ को मिली नहीं लड़की कोई उस सेे बेहतर जो बोल थी गई मुझ को यूँ डिज़र्व बेटर
Abhay Aadiv
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