वही जो मौत से पहले हमारी मौत होती है नहीं होती हैं आँखें नम मगर इक सौत होती है
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ख़ुदी को कर बुलंद इतना कि हर तक़दीर से पहले ख़ुदा बंदे से ख़ुद पूछे बता तेरी रज़ा क्या है
Allama Iqbal
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शाख़ों से टूट जाएँ वो पत्ते नहीं हैं हम आँधी से कोई कह दे कि औक़ात में रहे
Rahat Indori
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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मुद्दतें गुज़र गई 'हिसाब' नहीं किया न जाने अब किस के कितने रह गए हम
Kumar Vishwas
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दिल ना-उमीद तो नहीं नाकाम ही तो है लंबी है ग़म की शाम मगर शाम ही तो है
Faiz Ahmad Faiz
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ज़रूरी तो नहीं उस की हँसी में प्यार ही हो हँसी के इस जहाँ में और भी मतलब बहुत हैं
Vishakt ki Kalam se
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तुम किसी की ख़्वाहिशों को ख़्वाब मेरे से न तोलो बोल सकते हो हक़ीक़त तो ख़ुशी से आज बोलो
Vishakt ki Kalam se
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यहाँ भी मैं तिरा दीदार करने की ख़ुशी में मिटा दूँगा अभी ये रार मरने की ख़ुशी में
Vishakt ki Kalam se
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ज़रूरत ढूँढ़ लाती है पता मेरा मुझे अब इस पते से दूर जाना है
Vishakt ki Kalam se
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तू ही ज़रूरी हो गया है आज कल भोले मुझे अब थाम मेरे साथ चल
Vishakt ki Kalam se
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