वहीं से हार कर लौटा मुसाफ़िर जहाँ से जीत कर जाना भला था
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बिछड़ कर उस का दिल लग भी गया तो क्या लगेगा वो थक जाएगा और मेरे गले से आ लगेगा मैं मुश्किल में तुम्हारे काम आऊँ या ना आऊँ मुझे आवाज़ दे लेना तुम्हें अच्छा लगेगा
Tehzeeb Hafi
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मुझ से मत पूछो के उस शख़्स में क्या अच्छा है अच्छे अच्छों से मुझे मेरा बुरा अच्छा है किस तरह मुझ से मुहब्बत में कोई जीत गया ये न कह देना के बिस्तर में बड़ा अच्छा है
Tehzeeb Hafi
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उन की सोहबत में गए सँभले दोबारा टूटे हम किसी शख़्स को दे दे के सहारा टूटे ये अजब रस्म है बिल्कुल न समझ आई हमें प्यार भी हम ही करें दिल भी हमारा टूटे
Vikram Gaur Vairagi
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तुम्हारे शहर का मौसम बड़ा सुहाना लगे मैं एक शाम चुरा लूँ अगर बुरा न लगे
Qaisar-ul-Jafri
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कबूतर इश्क़ का उतरे तो कैसे? तुम्हारी छत पे निगरानी बहुत है इरादा कर लिया गर ख़ुद-कुशी का तो ख़ुद की आँख का पानी बहुत है
Kumar Vishwas
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यहाँ कोई नहीं मरता किसी के दूर जाने से किसी के दूर जाने से यहाँ कोई नहीं मरता
Dinesh Sen Shubh
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मसअला ये नहीं है तुम आओ हाँ मगर तुम से कौन अच्छा है
Dinesh Sen Shubh
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कोई आवाज़ देता है कहीं से मगर दिखता नहीं है कौन है वो
Dinesh Sen Shubh
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ख़ुश है तू गर दग़ा में सही ख़ुश रहे मैं भी तो चाहता हूँ यही ख़ुश रहे
Dinesh Sen Shubh
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तमाम रात निकलनी है याद करने में तमाम दिन हुई थीं कोशिशें भुलाने की
Dinesh Sen Shubh
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